अए बन्दे तू रुक तोह ज़रा
यह दुनिआ है खुशियों से भरा ,
इंसानियत को तोह समझो ज़रा।

यह क्या तुम कर रहे हो,
इंसान के मन में ज़हर क्यों घोल रहे हो ?
जब भगवान् basa hon हमारे तन-मन में।

भगवन के अनदेखी में ,
अपने जीवन के बेरुखी से ,
क्यों कर रहे हो अत्याचार ?
मासूमों को बनाकर अपना शिकार ,
उजारकर उनका संसार,
जब तुमको भी जाना है एक दिन प्रभु के द्वार।

नफरत को छोर,
चलो प्यार और शांति के ओर।
अपना लो शांति के रास्तें,
भगवन और उपरवाले के वास्ते।

यह दुनिआ है खुशियों से भरा,
बस कर! अब तोह आखें खोल ज़रा !

(By: Atish Home Chowdhury – Dated: 27/12/2011 – in My Literary Copy)

Copyright Protected !

Advertisements